Monday, December 17, 2012

Bhringraj (Eclipta Alba) Eclipta, भृंगराज

Eclipta prostrata (Scientific Name: Eclipta alba) commonly known as false daisy, yerba de tago, and bhringraj, is a species of plant in the family Asteraceae. It is known as bhangra, bhringaraj, and bhringraja. Widelia calendulacea is known by the same names, so the white-flowered Eclipta alba is called white bhangra and the yellow-flowered W. calendulacea is called yellow bhangra.

भृंगराज को केशराज, केशरंजन आदि नामो से जाना जाता है.

The plant has traditional uses in Ayurveda. It is bitter, hot, sharp and dry in taste.
Bhringaraj is the main herb for the hair care and cirrhosis in Ayurveda. It is believed to maintain and rejuvenate hair, teeth, bones, memory, sight, and hearing.
It works to rejuvenate kidneys and liver. As oil, it treats graying and balding, makes the hair darker, and promotes deep sleep. It also improves complexion.
In Ayurveda, the root powder is used for treating hepatitis, enlarged spleen and skin disorders. Mixed with salt, it relieves burning urine sensation. Mixed with a little oil and applied to the head, the herb relieves headache.
Bhringraj is also used in to prevent repeated miscarriage and abortion. It is also used to relieve post-delivery uterine pain. The leaves of this herb are used to reduce uterine bleeding.
The extract taken of its leaves is mixed with honey and given to infants, for the expulsion of worms. Bhringaraj is also given to children in case of urinary tract infections.
Fumigation with Bhringaraj is considered to bring about relief in piles.
Bhringaraj oil is has anti-aging properties, as it has a rejuvenating effect on the body. It is also given as a general tonic in cases of debility.
Bhringaraj is used extensively by Ayurvedic practitioners, for treating skin diseases and eye infections.
Due to its anti-inflammatory properties, the herb is also used for treating hyperacidity.
It is reported to improve hair growth and colour. Petroleum Ether extracts of E. prostrata decreased the amount of time it took for hair to begin regrowing and to fully regrow.
भृंगराज की पत्तियों का रस का सेवन दही के साथ करने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है. भृंगराज, बहेड़ा, आंवला और हर्रा के समभाग के चूर्ण के लेने से अम्लपित्त और यकृत की सूजन में लाभ मिलता है. भृंगराज के बीज मिश्री के साथ लेने से पौरुष शक्ति बढ़ती है. भृंगराज, प्याज और तुलसी के स्वरस में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर इसकी बूंदे आँख में डालने से नेत्र ज्योति बढ़ती है.
बाल काले रखने हैं तो भृंगराज की ताजी पत्तियों का रस रोजाना सिर पर मल कर सोयें।
पीलिया एक जानलेवा रोग है ,लेकिन आप रोगी को पूरे भृंगराज के पौधे का चूर्ण मिश्री के साथ खिला दीजिये 100 ग्राम चूर्ण पेट में पहुंचाते ही #पीलिया ख़त्म . या फिर भृंगराज के पौधे को ही क्रश करके 10 ग्राम रस निकालिए ,उसमें 1 ग्राम काली मिर्च का पावडर मिलाकर मरीज को पिला दीजिये .दिन में 3 बार ,3 दिनों तक इस मिश्रण में थोड़ा मिश्री का चूर्ण भी मिला लीजियेगा ।
गुदाभ्रंश हो गया हो तो भृंगराज की जड़ और हल्दी की चटनी को मलहम की तरह मलद्वार पर लगाए इससे कीड़ी काटने की बीमारी मेंभी आराम मिलता है .गुदा भ्रंश में मल द्वार थोड़ा बाहर निकल आता है.
पेट बहुत खराब हो तो भृंगराज कीपत्तियों का रस या चूर्ण दस ग्राम लीजिये उसे एक कटोरी दही में मिला कर खा जाएँ ,दिन में दो बार ३ दिनों तक .
आँखों की रोशनी तेज रखनी है तो भृंगराज की पत्तियों का ३ ग्राम पाउडर १ चम्मच शहद में मिला कर रोज सुबह खाली पेट खाएं।
भृंगराज सफ़ेद दाग का भी इलाज करता है मगर काली पत्तियो और काली शाखाओं वाला भृंगराज चाहिए।इसे आग पर सेंक कर रोज खाना होगा ,एक दिन में एक पौधा लगभग चार माह तक लगातार खाए।
जिन महिलाओं को गर्भस्राव की बिमारी है उन्हें गर्भाशय को शक्तिशाली बनाने के लिए भृंगराज की ताजी पत्तियों का ५-६ ग्राम रस रोज पीना चाहिये|
त्रिफला के चूर्ण को भृंगराज के रस की ३ बार भावना देकर सुखा कर रोज आधा चम्मच पानी के साथ निगलने से बाल कभी सफ़ेद होते ही नही।
अगर कोई तुतलाता हो तो इसके पौधे के रस में देशी घी मिला कर पका कर दस ग्राम रोज पिलाना चाहिए ,एक माह तक लगातार।
इसके रस में यकृत की सारी बीमारियाँ ठीक कर देने का गुण मौजूद है लेकिन जिस दिन इसका ताजा रस दस ग्राम पीजिये उस दिन सिर्फ दूध पीकर रहिये भोजन नहीं करना है ,यदि यह काम एक माह तक लगातार कर लिया जाय तो कायाकल्प भी सम्भव है।

बच्चा पैदा होने के बाद महिलाओं को योनिशूल बहुत परेशान करता है,उस दशा में भृंगराज के पौधे की जड़ और बेल के पौधे की जड़ का पाउडर बराबर मात्रा  में लीजिये और शहद के साथ खिलाइये ,५ ग्राम पाउडर काफी होगा ,दिन में एक बार खाली पेट लेना है ७ दिनों तक!